Sunday, June 21, 2009
तुम्हारी बातें
याद आती है मुझे कई पुरानी बातेंवो गीले शिकवे, वो सरगिरानी बातेंहर शख्स तो है शामील इस शोर मेंमगर मुद्दत हुई मुझे सुने इंसानी बातेंजो भी होता है अच्छे के लिए होता हैज़माने से सुनता आया ये नादानी बातें मैं जो चाहूं वो हो खुदा को नामंज़ूरमुझे समझ ना आए ये आसमानी बातेंफिर क्यों ना चीखूं, ना करूँ हाय हायकौन सुनता है अब यहाँ बेज़ुबानी बातेंचुप ही रहो तुम तो अच्छा है हो बस, और तुम्हारी दीवानी बातें
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हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
ReplyDeleteकृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें
बहुत खूब |
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